सीबीआई न्यायालय, अहमदाबाद ने आज यानि दिनांक 10.04.2026 को एक बैंक धोखाधड़ी मामले में पंजाब नेशनल बैंक के गुरिंदर सिंह, सेवानिवृत्त सहायक महाप्रबंधक, के.जी.सी.एस. अय्यर, सेवानिवृत्त मुख्य प्रबंधक एवं के.ई. सुरेंद्रनाथ, सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक; तथा निजी व्यक्तियों नामतः संजय नागजीभाई पटेल, निदेशक, मेसर्स जलपा एंटरप्राइज प्रा. लि., सूरत; सतीश नागजीभाई डावरा, प्रोप्राइटर, मेसर्स बापा सीताराम एंटरप्राइज, सूरत; हितेश डोमाडिया, मेसर्स एच. डोमाडिया एंड कंपनी, सूरत; वैशालीबेन डावरा, प्रोप्राराइटर मेसर्स वी.एस. टेक्सटाइल्स, सूरत; रमिलाबेन भिकाडिया, प्रोप्राइटर, मेसर्स प्रियांशी टेक्सटाइल्स तथा मेसर्स जलपा एंटरप्राइज प्रा. लि. को दोषी ठहराया और सजा सुनाई।

आरोपी गुरिंदर सिंह, सेवानिवृत्त सहायक महाप्रबंधक; के.जी.सी.एस. अय्यर, सेवानिवृत्त मुख्य प्रबंधक एवं के.ई. सुरेंद्रनाथ, सेवानिवृत्त वरिष्ठ प्रबंधक, प्रत्येक को ₹1 लाख के जुर्माने के साथ दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई। न्यायालय ने अन्य आरोपियों को निम्नानुसार सजा सुनाई: संजय नागजीभाई पटेल को ₹50,000 के जुर्माने के साथ तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई; सतीश नागजीभाई डावरा को ₹50,000 के जुर्माने के साथ दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई; हितेश डोमाडिया को ₹1,00,000 के जुर्माने के साथ तीन वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई; वैशालीबेन डावरा को ₹50,000 के जुर्माने के साथ दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई एवं रमिलाबेन भिकाडिया को ₹50,000 के जुर्माने के साथ दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई और न्यायालय ने मेसर्स जलपा एंटरप्राइज प्रा. लि. पर ₹50,000 का जुर्माना लगाया।

केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने यह मामला दिनांक 22.08.2016 को आरोपी एम श्री शैलेश भिखाभाई सतासिया, प्रोप्राइटर मेसर्स श्री काली टेक्सटाइल्स, सूरत, संजय नागजीभाई पटेल, निदेशक, मेसर्स जलपा एंटरप्राइज प्रा. लि., सूरत, सतीश नागजीभाई डावरा, प्रोप्राइटर मेसर्स बापा सीताराम एंटरप्राइज, सूरत तथा अज्ञात निजी व्यक्तियों एवं अज्ञात लोक सेवकों के विरुद्ध दर्ज किया था। यह आरोप था कि मेसर्स श्री काली टेक्सटाइल्स ने अपने प्रोप्राइटर आरोपी शैलेश भिखाभाई सतासिया के माध्यम से दिनांक 10.07.2011 को ₹370.00 लाख के मियादी ऋण तथा ₹40.00 लाख की कैश क्रेडिट सीमा के लिए आवेदन किया था, जिसका उद्देश्य 44 वाटर जेट लूम मशीनों की खरीद एवं सामान्य व्यावसायिक गतिविधियों का संचालन था। आरोपी वरिष्ठ प्रबंधक के.ई. सुरेंद्रनाथ तथा आरोपी मुख्य प्रबंधक के.जी.सी.एस. अय्यर की अनुशंसा के पश्चात, उक्त ऋण सुविधाएं दिनांक 29.07.2011 को तत्कालीन सहायक  महाप्रबंधक गुरिंदर सिंह द्वारा स्वीकृत की गईं थीं। इन ऋणों की प्राथमिक प्रतिभूति वही 44 मशीनें थीं, जबकि संपार्श्विक सुरक्षा के रूप में विभिन्न भूखंड एवं आवासीय फ्लैट रखे गए थे।

जांच से पता चला कि आरोपी शैलेश भीखाभाई सतासिया, प्रोप्राइटर मैसर्स श्री काली टेक्सटाइल्स, सूरत और अन्य निजी व्यक्तियों ने उन्हें असली के रूप में उपयोग करने के इरादे से जाली दस्तावेज प्रस्तुत किए और इन जाली/झूठे दस्तावेजों के साथ-साथ अन्य तथ्यों के आधार पर, आरोपी लोक सेवकों ने बैंक के दिशानिर्देशों का पालन किए बिना, फर्जी दस्तावेजों को असली के रूप में स्वीकार किया और ऋण सुविधाओं का संवितरण कर दिया जिससे आरोपी व्यक्तियों को अनुचित लाभ हुआ और पंजाब नेशनल बैंक, सूरत को ब्याज के साथ 156.98 लाख रुपये का संगत नुकसान हुआ।

जांच पूर्ण होने के पश्चात, सीबीआई ने दिनांक 29.06.2016 को आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दाखिल किया था।

माननीय न्यायालय ने विचारण (ट्रायल) के बाद सभी आरोपियों को दोषी ठहराया और तदनुसार सजा सुनाई।

 

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